• Sumit Singh

लव जिहाद: जुर्म या जुमला?

यूं तो प्यार की राह कभी आसान थी ही नहीं और ना ही कभी सत्ता पर काबिज़ रहनुमाओं ने उसे आसान करने की कवायद की लेकिन उस राह में रोड़े अटका कर सबने अपनी-अपनी सहूलियतों से राजनीतिक रोटियाँ अवश्य सेंकी। एक कटु सत्य तो यह भी है कि जब जब हुक्मरान अपने प्रदेश को संचालित करने में असफल महसूस करने लगते है या कानून व्यवस्था की बागडोर हाथ से फिसलने लगती है तब तब ये कोई ना कोई ऐसा बिगुल बजा उठते है जिससे समाज का ध्यान वास्तविक मुद्दों और उनकी नाकामियों से हटकर धर्म और जाति की सांप्रदायिक कट्टरता की तंग ज़ेहन गलियों में कहीं भटक जाए।

संस्कृति एवं सभ्यता के चौकीदारों के लिए वैसे तो मोहब्बत हर दौर में खतरा रही है। लेकिन वर्तमान दौर में इसका स्वरूप थोड़ा बदला है। अब यह खतरा ना होकर राजनीति का अस्त्र बन गया है। ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश राज्य का है जहां कथित ‘लव जिहाद’ कानून पर जमकर बहस छिड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ योगी सरकार के कानून प्रस्ताव को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंजूरी दे दी है। अब इस बिल को 6 महीने के भीतर विधानसभा और विधानमंडल में पास कराना होगा जिसके बाद यह कानून प्रदेश में लागू हो जाएगा।

लव जिहाद आखिर क्या बला है?

देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी अनेकों खबरें आई और आती रहती है कि मुसलमान युवक संगठित रूप से हिंदू रूप धारण कर हिंदू लड़कियों को बहला फुसलाकर अपने साथ भगा ले जाते है और शादी कर लेते है जिसके पश्चात उन लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। कहा यह भी जाता है कि यह विदेशी चंदे की मदद से सोची समझी साजिश के तहत होता है जिससे मुसलमानों की आबादी बढ़ने की दर हिंदुओ की आबादी बढ़ने की दर से अधिक हो जाए और निकट भविष्य में भारत में मुसलमानों की जनसंख्या हिंदुओ की आबादी को पार कर जाए। परन्तु विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई जांच और पूछताछ में पाया गया है कि लव जिहाद का आरोप बेहूदा, काल्पनिक और बिना किसी साक्ष्य का है। हालांकि कुछ ऐसे मामले अवश्य है जहां वाकई में पहचान छुपाकर शादी रचाई गई या जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया जिससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता लेकिन उन दोषियों को सजा दिलाकर पीड़ितो को न्याय मिले यह सुनिश्चित करने से ज्यादा लगन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को जुमलेबाजी में लगती है। तभी किसी हुक्मरान को यह अन्तर्राष्ट्रीय साजिश लगती है, किसी को इसमें विदेशी फंडिंग दिखती है तो किसी को इसमें हिंदू धर्म खतरे में पड़ा नज़र आ जाता है। मजे की बात यह भी है कि लव जिहाद का भूत चुनाव खत्म होते ही कहा भाग जाता है किसी को नहीं पता।

नए कानून की जरूरत क्यों आन पड़ी?

यह बताना लाज़मी हो जाता है कि आज की तारीख तक लव जिहाद शब्द की कोई कानूनी हैसियत नहीं है और न ही अब तक कानून के तहत इस शब्द को परिभाषित किया गया है। न ही केन्द्र या राज्य की किसी भी संस्था ने कभी किसी कानूनी धारा के तहत लव जिहाद के मामले में कोई केस दर्ज किया है। सवाल यह भी है कि आखिर कथित लव जिहाद पर कानून बनाने की नौबत क्यों आन पड़ी? और योगी सरकार को इतनी आपाधापी में यह अध्यादेश क्यों लाना पड़ा? जवाब ज्यादा जटिल है नहीं। बात बस इतनी सी है की सरकार को लगता है कि समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उसे समय-समय पर कुछ न कुछ प्रयास करते रहना चाहिए। वह इसलिए क्योंकि उसके दो फायदे है। एक तो यह कि चुनावों में ध्रुवीकरण का खेल करने में आसानी होती है जिससे संप्रदाय के आधार पर ध्रुवीकृत लोग सत्ता से सवाल करने की बजाय आपस में ही एक-दूजे को अविश्वास और शक की नजर से देखने में लग जाए और दूसरा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता की नजरों में धूल झोंकना।

वैसे लव जिहाद को क़ानून का रूप देने की आवाज़ निकिता तोमर हत्याकांड के बाद से ही तूल पकड़े हुए है। हरियाणा के वल्लभगढ़ में निकिता तोमर नाम की एक छात्रा की कॉलेज से लौटते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निकिता के परिवार ने तौसीफ नामक युवक पर आरोप लगाया था कि वह निकिता पर शादी करने के लिए इस्लाम अपनाने का दबाव बना रहा था, लेकिन निकिता ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। इस मामले को लव जिहाद से जोड़ते हुए हिंसा और प्रदर्शन की भी कई घटनाएँ सामने आई थीं। इसके बाद से ही भाजपा शासित तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने ऐलान पर ऐलान करना आरंभ कर दिया।

हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश उपचुनाव मे भी उन क्षेत्रों में चुनावी सभाओं के दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने का ऐलान करते हुए चेतावनी दी और कहा कि जो लोग बहू-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करते हैं, वे अगर नहीं सुधरे तो ‘राम नाम सत्य है’ की उनकी अंतिम यात्रा निकलने वाली है। इस ऐलान के तुरंत बाद हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने फटाफट एक ट्वीट कर कहा कि हरियाणा में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने पर विचार किया जा रहा है। ऐसे माहौल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भला क्यों पीछे रहते। उन्होंने भी अपने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर यह ऐलान कर दिया कि उनके प्रदेश में लव जिहाद और शादी के लिए धर्म परिवर्तन किसी भी रूप में नहीं चलेगा। यह पूर्ण रूप से अवैध और गैर-कानूनी है, इसके खिलाफ मध्य प्रदेश में कानून बनाया जाएगा।

लव जिहाद मामले से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी अछूता नहीं है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने महाराष्ट्र जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की जिसके बाद यह मुलाकात विवादों के चलते सुर्खियों में आयी। उन्होंने महाराष्ट्र में लव जिहाद के कथित रूप से बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए लगाम कसने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था। सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि उनके पास लव जिहाद से जुड़ा कोई डेटा मौजूद नहीं है। आरटीआई के जवाब से पता चला है कि महाराष्ट्र में बढ़ रहे लव जिहाद के मामलों को लेकर रेखा शर्मा का दावा सबूतों पर नहीं बल्कि राजनीति से प्रेरित था।

आखिर क्या है योगी सरकार का नया कानून?

योगी सरकार के मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 को मंजूरी दी है। इसे ही आमतौर पर ‘लव जिहाद’ कानून कहा जा रहा है। हालांकि, कानून के प्रस्ताव में कहीं भी इस शब्द का जिक्र भी नहीं किया गया है। इस कानून में विवाह के लिए छल, कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा इस कानून के मुताबिक, धर्म परिवर्तन के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी और यह बताना होगा कि धर्म परिवर्तन जबरन, दबाव डालकर, लालच देकर या किसी तरह के छल कपट से नहीं किया जा रहा है। अनुमति से पहले 2 महीने का नोटिस देना होगा। ऐसा न करने पर 3 साल तक की सजा हो सकती है, वहीं कम से कम 10 हजार का जुर्माना भी देना होगा। अगर कोई सिर्फ लड़की के धर्म परिवर्तन के लिए उससे शादी करेगा तो वह शादी निरस्त कर दी जाएगी, यानी उसे अमान्य माना जाएगा। यदि कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसे 3 साल से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा कम से कम 50,000 रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा। साथ ही धर्म परिवर्तन में शामिल संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कानून में नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल तक की सजा का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही यह अपराध गैर ज़मानती होगा।

इस कानून की पृष्ठभूमि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने प्रियांशी/कुमारी शमरेन और अन्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी और अन्य, को बनाया जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी जिसमें एक विवाहित जोड़े द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि लड़की जन्म से मुस्लिम थी और उसने शादी से एक महीने पहले ही अपना धर्म बदलकर हिंदू धर्म अपना लिया था। विशेष रूप से जज ने नूरजहां बेगम/अंजलि मिश्रा और अन्‍य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य, जिसमें कहा गया ‌था कि विवाह के उद्देश्य से धर्मांतरण अस्वीकार्य है, का भी उल्लेख किया था। 11 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक जजमेंट में माना था कि नूरजहां और प्रियांशी में “फैसले अच्छे कानून नहीं हैं”। दो जजों की खंडपीठ ने कहा था कि हम यह समझने में विफल हैं कि यदि कानून एक ही लिंग के दो व्यक्तियों को एक साथ शांति से रहने की अनुमति देता है, तो न तो किसी व्यक्ति और न ही परिवार या यहां तक ​​कि राज्य को भी दो वयस्‍कों के संबंधों पर आपत्ति हो सकती है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के क्या है मायने?

यूपी में लव जिहाद चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी पसंद का जीवन साथी चुनना सबका मौलिक अधिकार है। महज अलग-अलग धर्म या जाति का होने की वजह से किसी को साथ रहने या शादी करने से नहीं रोका जा सकता है। ऐसे रिश्तों पर एतराज जताने और विरोध करने का हक न तो उनके परिवार को है और न ही किसी व्यक्ति या सरकार को। अगर उनका परिवार या राज्य उनके शांतिपूर्ण जीवन में खलल पैदा कर रहे है तो वो उनकी निजता के अधिकार का अतिक्रमण है। हाईकोर्ट ने यूपी के कुशीनगर में लव जिहाद से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए यूपी सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसलों के आधार पर महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने को अवैध बताया गया था। हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच से आए फैसलों पर भी असहमति जताई है और कहा है कि उन फैसलों में निजता और स्वतंत्रता के अधिकारों की अनदेखी की गई थी। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि एतराज और विरोध करने वालों की नजर में कोई हिन्दू या मुसलमान हो सकता है, लेकिन कानून की नजर में अर्जी दाखिल करने वाले प्रेमी युगल सिर्फ बालिग जोड़े हैं और शादी के पवित्र बंधन में बंधने के बाद पति-पत्नी के तौर पर साथ रह रहे हैं।

संविधान के पन्नों से…

भारत के संविधान में देश के सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं। धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 25 में शामिल है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, पालन करने, प्रचार करने की स्वतंत्रता है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कोई विशेष धर्म मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। वहीं विशेष विवाह कानून भी है, जिसके तहत अलग-अलग धर्म से आने वाले वयस्क लड़के और लड़की बिना अपना धर्म बदले शादी कर सकते हैं। लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन करके विवाह को मान्यता हमारे संविधान में भी नहीं है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिस लव जिहाद विरोधी कानून की बात कर रहे हैं, वह यही धर्मांतरण कानून है, जिसका ड्राफ्ट विधि आयोग ने तैयार किया है। अगर ऐसा है तो ऐसा कानून लागू करने वाला यूपी कोई पहला राज्य नहीं होगा। इस तरह का कानून बनाने वाला ओडिशा पहला राज्य था। अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू हैं और यह किसी एक धर्म विशेष नहीं, बल्कि सभी धर्मों पर समान रूप से लागू है। यूपी में पेश ड्राफ्ट में भी यही प्रावधान है। इसमें अलग क्या है, आप लव जिहाद के नाम पर एक खौफ भर पैदा करेंगे।

एसआईटी की रिपोर्ट का साजिश से इंकार!

पिछले दिनों यूपी के कानपुर में सबसे अधिक कथित लव जिहाद के केस दर्ज किए गए थे जिससे लव जिहाद के मामलों ने काफी तूल पकड़ा हुआ था। इस पर गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी है। हालांकि एसआईटी ने इसमें किसी भी साजिश से इंकार कर दिया और साफतौर पर कहा कि साजिश के कोई सबूत नहीं मिले हैं। वहीं कानपुर रेंज के आईजी के मुताबिक कुल 11 केस में 13 लड़कियां शामिल थीं। इनमें 3 लड़कियां बालिग थी जिन्होंने अपनी मर्जी से शादी की थी। बाकी बचे केस में 8 लड़कियां नाबालिग हैं। इन लड़कियों के शारीरिक शोषण में शामिल सभी 8 लड़के जेल भेजे गए हैं। वहीं 3 केस ऐसे मिले जिनमें लड़कों ने अपने नाम बदले थे।

केरल के चर्चित हादिया मामले की एनआईए जांच का निष्कर्ष!

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी (एनआईए) को केरल में हुए अंतर धार्मिक विवाह के कथित लव जिहाद होने के कोई प्रमाण नहीं मिले। एनआईए ने इन मामलों में अपनी जांच खत्म करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऐसे विवाहों में लव जिहाद जैसा कुछ नहीं था और किसी भी तरह के जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर भी कोई सबूत नहीं मिले थे। यह जांच चर्चित हादिया मामले के चलते हुई थी। केरल के कोट्टायम ज़िले की अखिला अशोकन ने धर्म परिवर्तन के बाद हादिया जहां के रूप में शफीन जहां से निकाह किया था। इस मामले को हादिया के पिता ने लव जिहाद का नाम देते हुए केरल उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था जिसने यह शादी रद्द कर दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था। सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एनआईए ने केरल में कथित लव जिहाद के मामलों की जांच करते हुए 11 अंतरधार्मिक शादियों की पड़ताल की थी। यह 11 मामले 89 अंतरधार्मिक शादियों में से चुने गए थे जो पहले से ही कानूनी प्रक्रिया में हैं जिन्हें केरल पुलिस द्वारा एजेंसी को भेजा गया था। एनआईए के अफसरों के मुताबिक ज़्यादातर मामलों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े वही समान लोग और संस्थाएं मिली थी जिन्होंने धर्म परिवर्तन में लड़के या लड़की की मदद की थी। लेकिन एनआईए को किसी भी निर्धारित अपराध जैसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत इन व्यक्तियों के खिलाफ कोई मामला तय करने लायक कोई सबूत नहीं मिला।

लव जिहाद और बहिष्कार का दौर!

पिछले दिनों टाटा ग्रुप के मशहूर ज्वेलरी ब्रांड ‘तनिष्क’ ने भी काफी सुर्खियां बटोरी। कारण उनका नया विज्ञापन जिसके चलते तनिष्क विवादों में आ गया। दरअसल, कंपनी के एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर तनिष्क का बहिष्कार करने की मांग उठने लगी थी जिसके बाद कंपनी ने अपना विज्ञापन वापस ले लिया था। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे लव ज़िहाद को समर्थन देने वाला विज्ञापन बताया और इसे हटाने की मांग करने लगे। हालांकि, कई लोगों ने नफरत और भेदभावपूर्ण ट्वीट्स की आलोचना की और इन्हें भारत के धर्मनिरपेक्ष विचारों के विरुद्ध बताया। विज्ञापन अंतर्जातीय विवाह पर आधारित था जिसमें हिंदू-मुस्लिम परिवार को एकजुट दिखाने की कोशिश की गई थी।

पिछले दिनों नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘ए सूटेबल बॉय’ भी विवादों का हिस्सा रही। कई लोगों ने इसपर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर सोशल मीडिया पर इसका बहिष्कार करने का आवाह्न किया। मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि नेटफ्लिक्स पर ‘ए सूटेबल बॉय’ नामक फिल्म जारी की गई है जिसमें बेहद आपत्तिजनक दृश्य दिखाए गए हैं जो एक धर्म विशेष की भावनाओं को आहत करते हैं। मध्यप्रदेश के रीवा में भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य गौरव तिवारी ने रीवा पुलिस में नेटफ्लिक्स के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। सीरीज में दो धर्मों के युवक-युवती के बीच प्रेम को दिखाने और सीरीज के जरिए लव जिहाद को बढ़ावा देने को लेकर आरोप लगाए गए हैं।

2018 में आई अभिषेक कपूर की फिल्म ‘केदारनाथ’ में भी लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था। सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की फिल्म का केवल टीजर रिलीज हुआ था और विवाद इस कदर गहराया जैसे विरोधियों ने पूरी फिल्म देख ली हो। इस फिल्म पर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप उत्तराखंड के बीजेपी नेता अजेंद्र अजय द्वारा लगाया गया था। भाजपा नेता ने फिल्म में केदारनाथ धाम की मर्यादा पर प्रहार करने, धार्मिक भावनाओं को भड़काने और लव जिहाद को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय एवं फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष को शिकायत भेजी थी। उनकी शिकायत का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निदेशक (फिल्म्स) को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित भी किया था।

लव जिहाद पर बेतुके बयानों की बौछार!

2014 में देश में बढ़ते लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए मध्य प्रदेश की एक बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आदेश दिया था कि उनके क्षेत्र में दुर्गा पूजा एवं नवरात्रि के दौरान गरबा कार्यक्रमों में मुसलमान युवकों की एंट्री बैन रहेगी। उन्होंने ये भी कहा कि अगर मुसलमान युवक गरबा कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहते हैं तो उन्हें धर्म परिवर्तन कर पहले हिंदू धर्म अपनाना होगा। माथे पर तिलक लगाकर मुस्लिम युवक गरबा समिति के सदस्यों को बेवकूफ बनाकर गरबा कार्यक्रमों में घुसते हैं और हिंदू लड़कियों से जान पहचान बढ़ाते हैं।

2014 में ही तत्कालीन सांसद आदित्यनाथ योगी ने तो उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों की एक रैली में कह दिया था कि अब जोधाबाई अकबर के साथ नहीं जाएगी, अब सिकंदर अपनी बेटी चंद्रगुप्त मौर्य को दे जाएगा क्योंकि अब सरकार मोदी की है। उसी साल योगी आदित्यनाथ का एक और बयान सुर्ख़ियो में रहा। जिसमें वह यह कहते दिखाई दिए कि अगर मुस्लिम समुदाय के लोग एक हिन्दू लड़की को ले जाएंगे तो हम उनकी कम-से-कम 100 लड़कियों को ले आएंगे।

हाल के दिनों में बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा का लव जिहाद के खिलाफ बयान काफी चर्चा में है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि यह विदेशी ताकतों की साजिश है और इसमें दोषी को 10 साल की सजा का प्रावधान काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि इसमें आजीवन कारावास या मृत्यु दंड का प्रावधान होना चाहिये। साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा कि यह कोई आज की बात नहीं है यह बहुत सालों से होता आया है। प्यार करने के लिए बाहर से पैसे आते हैं। यह सब कुछ षडयंत्र है। उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि काजी, मौलवी छल से विवाह करवा देते है और यह सब कुछ सोचा समझा होता है। लव जिहाद तो हमारी संस्कृति में आता ही नहीं है। ये सारा किया धरा विधर्मियों का ही है।

ऐसे अनेकों बेतुके भड़काऊ बयान आपको सुनने को मिल जाएंगे और आप यह भी जान जाएंगे कि यह सारे बयान किसकी शह पर दिए जाते है ताकि समाज में ध्रुवीकरण और तेजी से हो। दिलचस्प बात यह है कि चुनावों और लव जिहाद का काफी घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। उधर चुनावों की तारीखों का ऐलान होता है और इधर लव जिहाद का बवंडर उठना शुरू हो जाता है खासकर जब चुनाव उत्तर प्रदेश में हो।

युवतियों की सूझबूझ पर प्रश्न तो नहीं?

लव जिहाद का विरोध करने वालों का एक पक्ष यह भी है कि यह शब्द ही महिला विरोधी है। सरकारें अपनी दलील में यह कहती है कि महिलाओं को प्रताड़ना से बचाने में लव जिहाद पर बनाए गए कानून कारगर साबित होंगे। परन्तु विडंबना यह है कि कुछ महिलाएं स्वयं इसके खिलाफ है। उनका मानना है कि लव जिहाद का ढोंग पीटने वाले ये वही लोग है जो हमारे पितृसत्तात्मक समाज से आते है और महिलाओं की सोचने, समझने एवं पसंद करने या चुनने की स्वतंत्रता को हीन दृष्टि से देखते है। तभी वह अक्सर यह कहे सुने जा सकते है कि लव जिहाद एक षड्यंत्र है और मुसलमान युवक हिंदू बनकर हिंदू युवतियों को बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाते है तथा उन भोली-भाली लड़कियों पर दबाव डालकर उनका धर्म परिवर्तन करवा देते है। इसका अर्थ इन रुपों में देखा जा सकता है कि क्या ऐसी दलीलें देने वाले हमारे समाज की लड़कियों की सूझबूझ की शक्ति पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाते? क्या हमारे समाज की युवतियां इतनी मासूम है कि कोई भी उन्हें आसानी से बहला फुसलाकर भगा ले जाएगा? क्या हमने लड़कियों के प्यार की पसंद एवं वो किसके साथ अपना जीवन व्यतीत करना चाहती है इस पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया? क्या हम लड़कियों को अभी भी सक्षम नहीं समझते कि वह अपने जीवनसाथी का निर्णय स्वयं ले सके? यह कह देना कि युवतियों को बहला फुसलाकर लव जिहाद को अंजाम दिया जाता हैं स्वयं ही इस बात का परिचायक है कि यह पितृसत्तात्मक समाज लड़कियों की स्वतंत्रता को जकड़ने का प्रयास करता है और करता रहेगा।

अध्यादेश को मंजूरी मिलते ही असर दिखना शुरू!

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लाए गए ‘विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश’ ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस कानून के तहत अबतक तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके है जिससे उत्तर प्रदेश राज्य की पुलिस हरकत में दिखाई दे रही है और कार्रवाई भी करती नजर आ रही है। इनमें पहला मुकदमा उत्तर प्रदेश के ही बरेली जिले में दर्ज किया गया जहां एक 20 वर्षीय विवाहित महिला को अपहरण की धमकी और धर्म बदलने के लिए दबाव डालने को लेकर मामला दर्ज किया गया है। आरोपी काफी समय से छिपा हुआ था। उसने कहा कि उसे डर था कि उसे गोली मार दी जाएगी। बरेली के बाद दूसरा मुकदमा मुजफ्फरनगर में दर्ज किया गया। वहां एक पति ने दो लोगों पर उसकी पत्नी को प्रेम जाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव डालने का आरोप लगाया। तीसरा मुकदमा मऊ में दर्ज हुआ जहां शादी से एक दिन पहले युवती का दूसरे धर्म के युवक ने अपहरण कर लिया। युवती के पिता ने आरोप लगाया कि अपहरण के बाद उसकी बेटी का धर्म परिवर्तन कराकर खुद युवक ने शादी कर ली है। मऊ की पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों के खिलाफ लव जिहाद का केस दर्ज किया है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी पुलिस की कार्रवाई देखने को मिली। लव जिहाद के शक में एक शादी को पुलिस ने रुकवा दिया। दरअसल 2 दिसंबर को होने वाली एक शादी पर एक स्थानीय हिंदू संगठन ने ऐतराज जाहिर किया जिसपर पुलिस ने भी एक्शन लेते हुए शादी को फिलहाल के लिए रुकवा दिया। परिजनों ने बताया कि ये शादी दोनों परिवारों की मर्जी और दोनों धर्मों के हिसाब से हो रही है। इस पर पुलिस ने कानून के तहत 2 महीने पहले डीएम के यहां आवेदन करने के लिए कहा। बहरहाल, शादी को रोक दिया गया है। पुलिस के अनुसार इस मामले में “अप्रत्यक्ष धर्मांतरण” हो रहा था इसलिए शादी को रुकवाया गया। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र के हिन्दू नेताओं में विरोध के सुर हैं।

इन कार्रवाईयों के बीच बरेली के दरगाह आला हजरत ने फतवा जारी करके लालच या जबरन तरीके से धर्म परिवर्तन कराने को गैर इस्लामिक करार दिया है। दारुल इफ्ता के अध्यक्ष ने कहा कि इस्लाम में ऐसी किसी चीज की कोई जगह नहीं है। यह सामाजिक बुराई है, जो पश्चिमी सभ्यता से फैली है। लव अंग्रेजी शब्द है जबकि जिहाद अरबी का शब्द है। इनका एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शरीयत की नजर में लव जिहाद की कोई हैसियत नहीं है।

-सुमित सिंह sumitsingh8254@gmail.com

चित्रित छवि पहली बार सी एन एन पर २ दिसंबर २०२० को दिखाई दी |

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